भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और 7वीं से 11वीं शताब्दी के बीच नागवंशी राजाओं द्वारा बनाया गया था। मंदिर की बनावट खजुराहो मंदिर के समान है, इसलिए इसे "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" भी कहा जाता है।

मंदिर का मुख पूर्व की ओर है और यह एक ऊंचे चबूतरे पर बना है। मंदिर में तीन प्रवेश द्वार हैं और इसके मंडप में 4 स्तंभ और 12 स्तंभ हैं। मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव, देवी पार्वती, अन्य देवी-देवताओं और यक्ष-यक्षियों की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं।

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, कलात्मक मूर्तियों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और 7वीं से 11वीं शताब्दी के बीच नागवंशी राजाओं द्वारा बनाया गया था। मंदिर की बनावट खजुराहो मंदिर के समान है, इसलिए इसे "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" भी कहा जाता है।

मंदिर का मुख पूर्व की ओर है और यह एक ऊंचे चबूतरे पर बना है। मंदिर में तीन प्रवेश द्वार हैं। इसके मंडप में 4 स्तंभ और 12 स्तंभ हैं। मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव, देवी पार्वती, अन्य देवी-देवताओं और यक्ष-यक्षियों की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं।

मंदिर के मंडप के पीछे गर्भगृह है। गर्भगृह में भगवान शिव का एक विशाल शिवलिंग स्थापित है। शिवलिंग के चारों ओर चार छोटे-छोटे शिवलिंग भी स्थापित हैं। गर्भगृह की छत पर एक सुंदर नक्काशीदार छतरी है।

मंदिर के बाहर एक सुंदर तालाब है। तालाब के चारों ओर कई छोटे-छोटे मंदिर और मठ हैं। तालाब के किनारे कई पेड़ और पौधे हैं, जो मंदिर परिसर को एक सुंदर दृश्य प्रदान करते हैं।

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, कलात्मक मूर्तियों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।