oldest person story, पटवारी नंदलाल पांडेय बायोग्राफी हिन्दी, रियल पर्सन हिस्ट्री

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oldest person story, पटवारी नंदलाल पांडेय बायोग्राफी हिन्दी, रियल पर्सन हिस्ट्री,परिचय 1900 जन्माष्टमी के दिन Shri Krishna ke Janm Divas per Janm lene ke Karan Inka naam Nandlal Rakha Gaya मृत्यु दिनांक८23 सितंबर सन 2004

पटवारी नंदलाल पांडेय बायोग्राफी 

एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जन्मे बालक जिनका जन्म जन्माष्टमी के दिन सन उन्नीस सौ ईस्वी में जब नंदलाल 6 वर्ष के हुए तो उनके पिता की मृत्यु हो गई नंदलाल दो बहनों और तीन भाइयों के बीच में सबसे छोटे थे पिता की मृत्यु के बाद छोटे-छोटे 5 बच्चों के साथ मायके चली गई नंदलाल का ननिहाल सीधी से दक्षिण में कमचड ग्राम में एक व्यवहर परिवार में था I 

नंदलाल की शुरुआती शिक्षा दीक्षा कंमचड उनके ननिहाल में हुई

 

नंदलाल की शुरुआती शिक्षा दीक्षा कंमचड उनके ननिहाल में हुई जब नंदलाल कुछ समझदार हुए तो उनको ननिहाल में रहना रास नहीं आया तब वह अपने पिता एक ग्रह ग्राम जोगीपुर के लिए वापस आए जब वह अपने गृह ग्राम जोगीपुर वापस आए तो देखा कि उनके हक जमीन जायदाद ग्रामीण जनों ने लूट ली है Tuta futa purana Pita Ke dwara Banaya Gaya Ghar hi Matra ses bacha hai

real life story in hindi

 

real life story in hindi, नंदलाल के स्वयं के कथन अनुसार उन्होंने बताया कि मेरी माता का स्वर्गवास 121 वर्ष में हुआ था उन्होंने बताया कि वह एकदम निरोगी काया थी लेकिन उनका पूरा शरीर एकदम बूढ़ा हो चुका था शरीर की चमड़ी हड्डियों से चिपक चुकी थी और कहीं-कहीं लटकती थी सिंगल बॉडी पर्सनालिटी थी

सीढ़ी नुमा छोटी-बड़ी तीन चारपाइयों

और उनको कोई उनकी बांह पकड़कर नहीं उठाता था उनकी बांह कसकर पकड़ने में उनकी चमड़ी छिल जाती थी जब वह है बुढ़ापे की अंतिम अवस्था में थी तो अपना नित्य क्रिया करने के लिए स्वयं सीडी नुमा छोटी-बड़ी तीन चारपाइयों की व्यवस्था की गई थी जिनके सहारे वह खुद अपने बलबूते नीचे उतरती और चढ़ती
पटवारी नंदलाल पांडेय सीधी 

 

यह उन दिनों की बात है जब विज्ञान ने किसी प्रकार का टीका का अविष्कार नहीं हुआ था टीवी  हैजा कालरा जैसी बीमारियों से लाखों लोग हर वर्ष मर जाते थे नंदलाल कुल मिलाकर तीन भाई थे और दो बहने थी नंदलाल के सबसे बड़े भाई का नाम ईश्वर चंद ब्राह्मण था
क्रमशः दूसरे नंबर के भाई राधिका प्रसाद ब्राह्मण था और तीसरे नंबर पर सबसे छोटे नंदलाल देश में अंग्रेजों का शासन था पूरा देश अंग्रेजों के अधीन हो चुका था लेकिन विन्ध्यदप्रदेश में राजा महाराजाओं का शासन था
Long Life tips
real life story 
real life story, ईश्वरचंद और नंदलाल का विवाह रीवा जिले के पैपखरा ग्राम में हुआ था 12 वर्ष की आयु के साथ ही अपने हिस्से की जमीन के लिए न्यायालय के चक्कर काटने लगे
ईश्वर चंद की जवानी में ही गंभीर बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई उनको दूसरे नंबर के भाई राधिका राम की 6 बेटियां थी
सभी भाइयों ने मिलजुल कर एक साथ काम किया और गांव में ही 15 एकड़ और जमीन खरीद ली,सन 1932 आते आते नंदलाल ने दो पुत्रियां और एक पुत्र को जन्म दिया
Lamba Jivan Jeene Ka ka Anubhav

दीर्घायु जीवनका मंत्र,रोजकी दिनचर्या

 1 – सुबह भोर में 5:30 बजे उठना जमीन में पैर पड़ने से पहले उसको हाथों से छूकर उसका धन्यवाद देना वह कभी नहीं भूलते थे

सुबह से उठकर एक गिलास पानी पीना जो रात को ही चारपाई के नीचे लोटा गिलास में भरकर रखा रहता है
भगवान की एक घंटा तक विधिवत पूजा

2 नित्य क्रिया के बाद स्नान करते स्नान करने के बाद सूर्य को एक लोटा जल और सूर्य नमस्कार करने के उपरांत महादेव भगवान की एक घंटा तक विधिवत पूजा पाठ करते अष्टगंध का रोज हवन करने तीन चार बार शंख बजाने के बाद घरी घंट बजा कर आरती करते पूजा पाठ करने के बाद रोज आधा घंटा तक अलोम विलोम प्राणायाम करते नाक दबाकर सांस रोकते और थोड़ी थोड़ी देर में छोड़ते

3  इतना सब नित्य क्रिया करने के बाद लगभग साडे आठ 9:00 बजने लगते हैं तब वह चाय पीते और कुछ नाश्ता भी करते

4 – मैं दोपहर के 12:00 बजने की पूर्व ही भोजन कर लेते उनके भोजन में 6 पतली छोटी रोटियां नाम मात्र का थोड़ा सा चावल रोज रहता था कुछ ना कुछ दाल सब्जी बहुत ही संयमित शाकाहारी भोजन उनको पसंद था

जब नंदलाल जवान हुए तो उस समय पर रीवा राजघराने के अंतिम राजा मार्तंड सिंह और उनके पिता का राज था

5 – इनको उसे राजतंत्र में पटबारा ( हाकिम ) पद पर नियुक्त किया गया था

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6 – उस समय के हाकिम अफसर को घोड़े और एक तो और छोटे कर्मचारी इनको सहयोग करने के लिए दिए गए

इनको पट्टा देने एवं कबजा लिखने बहुत सारे जमीनी अधिकार दिए गए जैसे कर वसूलने नामांतरण करने जो आज के समय में तहसीलदार को अधिकार है उससे भी अधिक अधिकार इन पटवारा को दिए गए थे

7 जरूरत पड़ने पर इनको सैनिक भी उपलब्ध कराए जाते थे अब इनका समाज में रूआब और रुतबा देखने लायक था

गांव क्षेत्र में इनके विषय में कई उल्लेख या मिलते हैं

 

 

गांव क्षेत्र में इनके विषय में कई उल्लेख या मिलते हैं इनके बारे में कई बुजुर्ग लोग कहते हैं इनको एक बार पेशाब लगी थी और बारिश और कीचड़ का भयानक मौसम था वह किसी किसान के घर में गए हुए थे

तब उन्होंने कहा कि मुझे अपने कंधे पर बिठा कर ले चलो और मैं वहां पेशाब करने के बाद फिर से यहां पर ले आओ उस मजदूर के कहीं पैर फिसल जाने के कारण वह पटवारी साहब को लेकर गिर गया यह बात धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल गई

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पटवारी साहब ऊछिनन करे हमा

 

लोग दबी जुबान यह कहने लगे पटवारी साहब ऊछिनन करे हमा कधैया म चढि के मूतै जात हाॅ

1980 आते-आते मेरे पूज्य बाबा जी लगभग 80 वर्ष के हो चुके थे 1984 मेरे बाबा जी के उम्र का हम उम्र कोई भी नहीं बचा था जीवित हमारे बाबा नंदलल 10 वर्ष 15 वर्ष और 20 वर्ष छोटे लोग बूढ़े हो कर मरते जा रहे थे

लोग इतना जल्दी कम उम्र में कैसे मर रहे

 

वह जब तक 99 वर्ष के नहीं हो गए तब तक वह स्वयं सुबह सुबह 5 किलोमीटर गल्ला मंडी स्थित दुकान से पैदल ही चार-पांच किलोमीटर अपने घर वापस आते थे जब आसपास के क्षेत्रों में अपने हम उम्र और अपने से उम्र में 10 या 15 वर्ष छोटे होने के बावजूद लोगों के मरने का समाचार जब उन्हें प्राप्त होता तब वह थोड़ा सा चिंतित होते और अफसोस जाहिर करते कि लोग इतना जल्दी इतना कम उम्र में कैसे मर रहे हैं

real person history

 

 सन 2000 आते-आते मेरे बाबा जी नंदलाल की उम्र लगभग 100 साल के करीब पहुंच चुकी थी मैंने इस उम्र में भी उनको बहुत करीब से देखा ना ही उनको कभी कोई गंभीर बीमारी थी वह अपना काम स्वयं करते थे

वह अपने हाथों में एक टाइटन की घड़ी बांध कर रखते थे वह उसमें अपना टाइम देखते रहते थे और वह अपनी शेविंग खुद अपने हाथों से रेजर लेकर बिना कोई शीशा देखें बना लेते थे पैदल चलने की उनकी आदत हमेशा से रही है और सों साल की उम्र तक पहुंच के थे तब भी वह पुरानी गल्ला मंडी स्थित अपनी दुकान कपड़ा का व्यवसाय करने के लिए रोज ग्राम जोगीपुर ओर से 4 किलोमीटर शहर में कपड़ा की दुकान चलाने रोज पैदल ही आया जाया करते थे

पैदल चलने की उनकी आदत

 

 जब वह तेज तेज कदमों से चलते थे तो कोई उनको देखकर यह नहीं कह सकता था कि यह 100 वर्ष के उम्र पार कर चुके होंगे वह अपनी जिंदगी में अपने सिद्धांतों को कभी समझौता नहीं करते थे

 वह राह में चल रहे हर किसी अरे गएरे का पर भरोसा नहीं करते थे वह कभी किसी से लिफ्ट लेकर चलना पसंद नहीं करते थे वह बिना सोच विचार किए तुरंत कोई निर्णय नहीं लेते थे

पैदल चलना पसंद था

अधिकांशतह उनको पैदल चलना ही पसंद था वह एक संविधान पसंद व्यक्ति थ उनको कानून पसंद था वह नियम कानून के खिलाफ कोई कार्य नहीं करते थे वह एक सख्त मिजाज पसंद व्यक्ति थे

 वह कभी अपने खाने पीने के समय में दूसरा काम नहीं करते थे वह हर दिन समय पर भोजन लेना पसंद करते थे वह अपने भोजन के टाइम में कभी परिवर्तन नहीं करते थे

100 वर्ष कोई छोटा टाइम नहीं होता इतने बरस इंसान की तीन चार पीढ़ियों का जन्म हो जाता है

 संकट के बादल
सन 1964 आते-आते उनके भाई और उनकी भाभी का एक बीमारी के बाद निधन हो गया वह अपने पीछे छह बेटियों को छोड़ कर गए थे जब किसी इंसान व्यक्ति का आन बान और शान और रुतबा में इजाफा होता है
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तो उनके विरोधियों और शत्रुओं की संख्या भी बढ़ती समाज सेवा की भावना बहुत ही प्रबल थी, नंदलाल एक बहुत ही सामाजिक और समाजसेवी व्यक्ति भी थे उनके जरूरत और समाज की पडने वाली अधिकांश जरूरत के सामान स्वयं उन्होंने एक व्यवस्था की थी
समाज के गरीब बेटियों के विवाह
समाज के गरीब बेटियों के विवाह के लिए जो भी सामान जो आज के जमाने में टेंट हाउस में मिलता है वह पूरा सामान वह अपने घर में रखते थे
जब गांव में या दूसरे गांव में जब किसी के यहां लड़के और लड़की का वैवाहिक कार्यक्रम होता था तो वह लोग हमारे घर से जरूरत का हर सामान लिस्ट बनाकर ले जाया करते थे
और वह एकदम निशुल्क रहता था काम हो जाने के बाद वह पूरा सामान वापस कर जाया करते थे ऐसा नहीं है कि वह बहुत धनी थे लेकिन उनको कोई चीज मांगना पसंद नहीं था
यह सामान और वस्तुएं बनाई थी उस जमाने में जो उनके पास सामाजिक समाज में आने वाली चीजें और समान थे कुछ इस प्रकार जेजम,दरी कालीन,कराह, कराही, भुजगीं,वरतन आदि
शिक्षा पर जोर
 1 – वह बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर काफी ध्यान देते थे और दूसरों के बच्चों को भी पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे अपने नातियो के साथ साथ वह गांव के और लड़कों को भी साथ में पढ़ाने के लिए बाध्य और प्रेरित करते रहते थे
वह अपने इकलौते पुत्र जगदीश प्रसाद पांडे को पढ़ा लिखा कर रीवा जी एमएच हॉस्पिटल में लैब टेक्नीशियन के पद पर नियुक्त करवाया था उनके पुत्र जगदीश प्रसाद का पढ़ने लिखने में बहुत रूचि थी वह इतिहासऔर अंग्रेजी विषय में बहुत दक्ष थे
मेडिकल पेसे में अंग्रेजी का बहुत महत्व है और उनके पुत्र जगदीश प्रसाद की अंग्रेजी ठीक-ठाक थी वह अंग्रेजी बोलना और लिखना पसंद करते थे
 2 – जब वह{हाकिम} पटवारा थे तो अपनी कार्यशैली के कारण नंदलाल को बहुत ख्याति मिली और वह क्षेत्र में चर्चा के विषय बने यह उन दिनों की बात है जब देश में सीमेंट का अविष्कार नहीं हुआ था और नहाने के लिए कोई कमरा अलग से नहीं बनाया जाता था
उस समय वह अपने नहाने के लिए एक चारपाई (माचा) मैं बैठकर नहाया करते थे जब मैंने चारपाई में बैठकर नहाने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि जमीन में नहाने से जमीन की धूल उनके शरीर में लग जाती है
चारपाई पर स्नान
और इस तरह चारपाई में स्नान करने में मिट्टी धूल के कण शरीर से नहीं चिपक पाते उनके जिंदगी में एक दौर ऐसा भी था जब वह जमीन पर पैर नहीं रखते थे वह चारपाई पर स्नान करते और लकड़ी के पीढे में बैठकर भोजन करते और अपनी थाली भी लकडी के पटरी पर ही रखते भोजन करने से पहले एक रोटी गाय के लिए निकालना कभी नहीं भूलते थे
3 – भोजन करने के उपरांत व एक रोटी कुत्ते को को देते थे लंबा और दीर्घायु जीवन कौन जीना नहीं चाहता हम अपने पाठकों को एक लंबा जीवन जीने का मंत्र देना चाहते थे और मैंने मेरे पूज्य बाबा जी से अधिक दीर्घायु जीने वाला व्यक्ति अपने आसपास नहीं देखा वही एवं निरोगी काया व्यक्ति थे
 ऐसा नहीं है कि वह बीमार नहीं होते थे सामान्यता सर्दी जुकाम बुखार जैसी बीमारी कभी कबार उनको भी होती थी लेकिन ऐसा कोई रोग उनके शरीर में नहीं था ऐसा नहीं है कि वह कभी उपवास नहीं करते थे
भूख हड़ताल मुख्य हथियार
 भूख हड़ताल ही उनका मुख्य और अहिंसात्मक हथियार था वह अपनी बात को मनवाने के लिए 15 दिन 20 दिन 25 दिन की भूख हड़ताल पर चले जाया करते थे भूख हड़ताल के दिनों में वह सिर्फ पानी पीते थे ऐसा नहीं है कि वह अपनी बात सिर्फ अपने घर में ही भूख हड़ताल करते थे जब उनका कोई कार्य प्रशासनिक रूप से अवरोधित किया जाता था तो वह कलेक्टर के सामने कलेक्ट्रेट परिसर में भी भूख हड़ताल करने से नहीं गुरेज करते थे
वह अपनी बात मनवाने के लिए 92 इयर्स के होने के बाद भी कलेक्टर के समक्ष भूख हड़ताल करने की कोशिश की वह मात्र 1 घंटे ही कंबल बिछाकर कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे थे की कलेक्टर साहब की उन पर नजर पड़ी और कलेक्टर ने तत्काल एक्शन लेते हुए मेरे बुजुर्ग बाबा जी को देखते ही उनकी बात मान गए
श्री नंदलाल ने अपने खेतों खेतों की सिंचाई के लिए शहर से 6 से 7 खंभों की दूरी पर लाइट ले गए थे जो उस समय चोरों के द्वारा छह के छह पूरे खंभों के तार काट लिए गए गेहूं का सीजन चल रहा था 15 दिन से अधिक समय बीत चुका था
गेहूं की फसल सूखने लगी
गेहूं की फसल सूखने लगी थी तब नंदलाल ने थक हार कर कलेक्ट्रेट परिसर में भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया वह मात्र 1 घंटे तक ही कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे होंगे की तत्काल कलेक्टर ने 1 घंटे के भीतर बिजली विभाग के कर्मचारियों को भेजकर 6 खंभों की लाइन और तार को दुरुस्त करवा दिया
इसी दौरान एक और बाकिया सामने आया बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ उनके दामाद भी बिजली विभाग की नौकरी कर रहे थे और वह विभाग के आदेश पर खंभा गाड़ने और तार खींचने नंदलाल के घर आए यानी अपनी ससुराल में पहुंचे उन्होंने अपने सहकर्मियों से बताया कि जहां आज हम यह तार खींचने जा रहे हैं

 वह हमारा ससुराल घराना है उन्होंने सोचा रहा होगा कि हम ससुराल जा घर में जा रहे हैं तो हमको अलग इज्जत दी जाएगी पर ऐसा नहीं हुआ जिस तरह बिजली विभाग के अन्य कर्मचारियों को इज्जत दी गई उसी तरह उन दामाद को भी कुआं के पास जहां कार्य चल रहा था वही नाश्ता और चाय दिया गया   इस बात का दामाद जी को बहुत बुरा लगा और फिर वह कभी नहीं आए धीरे-धीरे समय बीतता रहा और अब नंदलाल की उम्र 100 साल पार कर चुकी थी I

Patwari Nandlal Pandey ka Itihaas

यह बात सन 2004 की है जब उनके इकलौते पुत्र जगदीश प्रसाद पांडे को कैंसर हो गया जब यह बात श्री नंदलाल को पता चली तब पुत्र की यह तकलीफ और बीमारी को जानकर वह अंदर ही अंदर टूट गए उन्होंने अपनी तिजोरी से जो कुछ उनके पास बची खुची रकम थी उन्होंने उसको दीया और बोला कि इनका अच्छे से अच्छे डॉक्टर और अच्छी से अच्छी अस्पताल में इनका इलाज करवाइए I

मैं खुद अपने पिता को लेकर भारत के सभी जाने-माने अस्पतालों में लेकर उनका इलाज करवाया लेकिन उनके इलाज में कोई सफलता नहीं मिली दिन-ब-दिन उनका स्वास्थ्य  बिगड़ता चला गया और 1 दिन वह स्वर्गवासी हो गए I

पुत्र के प्राण निकल रहे थे और 105 वर्ष का बूढ़ा व्यक्ति रामायण की चौपाई और सीताराम सीताराम की ध्वनि से सारा घर गूंज उठा उस बूढ़े व्यक्ति का संयम और सब्र देखकर किसी के भी आंख से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा था I

real life motivational story in hindi

अब धीरे धीरे गांव के लोगों ने भी ताना मारना शुरू कर दिया कि पता नहीं यह बुड्ढा कब मरेगा पता नहीं क्या-क्या देखना इसको लिखा है पुत्र को मरे 10 दिन बीत चुके थे और अब श्री नंद लाल जी ने पुत्र के दसवें दिन से अपना भोजन पूर्णता त्याग कर दिया इस तरह 93 दिन तक भूखे रहकर उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया

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